मेरठ/दिल्ली। देश की आधुनिक परिवहन व्यवस्था में एक और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया, जब दिल्ली से मेरठ तक चलने वाली रैपिड रेल ने 160 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ लगाई। वहीं मेरठ मेट्रो भी 120 किलोमीटर प्रति घंटा की अधिकतम गति तक पहुंचती नजर आई। ट्रायल रन के दौरान सफर इतना सुगम और तेज रहा कि यात्रियों में उत्साह साफ दिखाई दिया।शुक्रवार को विशेष ट्रायल रन के दौरान सराय काले खां से बेगमपुल तक रैपिड रेल ने महज 39 मिनट में दूरी तय कर सबको चौंका दिया। यह यात्रा सामान्य सड़क मार्ग की तुलना में काफी कम समय में पूरी हुई। आधुनिक तकनीक से लैस इस कॉरिडोर पर सुरक्षा और सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया है।रैपिड रेल के कोच अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित हैं। आरामदायक सीटें, बेहतर वेंटिलेशन, डिजिटल सूचना प्रणाली और हाई-टेक कंट्रोल सिस्टम इसे खास बनाते हैं। ट्रायल के दौरान ट्रेन ने अपनी अधिकतम 160 किमी/घंटा की रफ्तार पकड़ी, जबकि मेरठ मेट्रो ने 120 किमी/घंटा की स्पीड तक पहुंचकर शहर के अंदर आवागमन को और तेज करने का संकेत दिया।बेगमपुल स्टेशन का भूमिगत स्वरूप यात्रियों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। जमीन से करीब 10 मीटर नीचे बने स्टेशन पर आधुनिक एस्केलेटर, लिफ्ट और सुरक्षा व्यवस्था की झलक देखने को मिली। सुरंग से निकलते ही मेरठ मेट्रो ने खुले ट्रैक पर हवा से बातें कीं, जिसे देखने के लिए मौजूद लोग रोमांचित नजर आए।करीब 23 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर में कई आधुनिक स्टेशन बनाए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि परियोजना के पूर्ण संचालन के बाद दिल्ली से मेरठ के बीच की दूरी कम समय में तय हो सकेगी, जिससे लाखों यात्रियों को लाभ मिलेगा। इससे न केवल ट्रैफिक जाम में कमी आएगी बल्कि प्रदूषण पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विकास को नई रफ्तार देगी। व्यापार, शिक्षा और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी। रोजाना दिल्ली-एनसीआर आने-जाने वाले यात्रियों के लिए यह सेवा किसी वरदान से कम नहीं होगी।कुल मिलाकर, रैपिड रेल और मेरठ मेट्रो की यह तेज रफ्तार यात्रा आधुनिक भारत की प्रगति का प्रतीक बनकर सामने आई है। अब आम जनता को इसके नियमित संचालन का इंतजार है, जो क्षेत्र के विकास को नई दिशा देगा।
