मवाना (मेरठ)।

थाना मवाना क्षेत्र के अंतर्गत अनुसूचित जाति के युवक सनी पर हुए हमले और बाद में उसे ही जेल भेजने के मामले में एक बड़ा कानूनी विरोधाभास सामने आया है। पीड़ित परिवार ने मवाना पुलिस की ही आधिकारिक चालानी रिपोर्ट और फोन कॉल की रिकॉर्डिंग को सीधे माननीय न्यायालय (विशेष न्यायाधीश, एससी/एसटी कोर्ट मेरठ) के समक्ष जज साहब के सामने पेश कर दिया है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि पुलिस ने साज़िश के तहत एक ही घटना में पहले साधारण धाराओं में कार्रवाई की और बाद में विपक्षी पक्ष के दबाव में संगीन मुकदमा दर्ज कर पीड़ित को जेल भेज दिया। मामला वर्तमान में अदालत के समक्ष विचाराधीन है।

### पुलिस की अपनी ही रिपोर्ट खोल रही है विरोधाभास की पोल

पीड़ित पक्ष द्वारा कोर्ट में जज साहब के सामने पेश किए गए नए दस्तावेज़

और अनुसार, इस पूरे मामले में क्रोनोलॉजी इस प्रकार है:

  • घटना वाली रात सिर्फ शांति भंग का दावा: पुलिस की आधिकारिक रिपोर्ट चालानी (अंतर्गत धारा 170/126/135 बीएनएसएस थाना मवाना) के मुताबिक, घटना की रात (16 अप्रैल 2026) को उप-निरीक्षक ऋषभ गुप्ता ने सनी को केवल शांति व्यवस्था भंग करने (आमदा फसाद) के आरोप में रात 10:00 बजे हिरासत में लिया था। इस मामले में सनी को माननीय न्यायालय/उपजिलाधिकारी महोदय के समक्ष पेश कर जमानत मिल गई थी।
  • कुछ दिन बाद अचानक बदला रुख: पीड़ित परिवार का आरोप है कि इस शांति भंग के चालान और जमानत के कुछ दिन बाद, पुलिस ने अचानक अपना रुख बदल लिया। विपक्षी पक्ष द्वारा एक प्राइवेट डॉक्टर की मदद से तैयार करवाई गई कहानी को आधार बनाकर सनी पर यह आरोप मढ़ दिया गया कि उसने दूसरे पक्ष को 11 से 12 बार चाकू मारे हैं। पुलिस ने इसी गंभीर मुकदमे को दर्ज कर सनी को सीधे जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया।

### फोन कॉल की रिकॉर्डिंग भी कोर्ट में पेश

पीड़ित पक्ष का कहना है कि उनके पास मौजूद ऑडियो रिकॉर्डिंग में साफ सुना जा सकता है कि पुलिसकर्मियों ने खुद फोन करके सनी को यह कहकर थाने बुलाया था कि—“हम थाने आ गए हैं, आप भी थाने आ जाओ।” पीड़ित पक्ष का आरोप है कि पुलिस ने खुद फोन करके बुलाया, जबकि बाद में विपक्षी पक्ष के 11-12 बार चाकू मारने के दावों को सही मानते हुए उसे जेल भेज दिया, जो कि पुलिस की अपनी ही शुरुआती चालानी रिपोर्ट (जिसमें ऐसी किसी गंभीर वारदात का ज़िक्र नहीं था) के बिल्कुल उलट है।

### पुराना घटनाक्रम और न्याय की गुहार

मूल प्रार्थना पत्र के अनुसार, पिता ओमप्रकाश ने आरोप लगाया था कि उनके बेटे सनी पर ही आरोपी प्रवीण, सोनू और रजत ने शराब के पैसे न देने पर हमला किया था, जिससे सनी की उंगलियां कट गई थीं। पिता का आरोप है कि मवाना पुलिस ने राजनीतिक दबाव में उनकी कोई सुनवाई नहीं की, बल्कि उल्टा पीड़ित को ही फंसा दिया।

अब पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता बालेश्वर प्रसाद (कचहरी मेरठ) के माध्यम से धारा 173(4) बीएनएसएस (BNSS) के तहत इन सभी सरकारी दस्तावेज़ों और ऑडियो साक्ष्यों को सीधे जज साहब के सामने रख दिया गया है। पीड़ित परिवार को उम्मीद है कि इन अकाट्य दस्तावेजी विरोधाभासों को देखते हुए माननीय न्यायालय दोषियों और जांच अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाएगा।

कानूनी नोट (Disclaimers):

  1. यह समाचार पूरी तरह से न्यायालय में प्रस्तुत पुलिस चालानी रिपोर्ट पूर्व प्रार्थना पत्रों तथा पीड़ित पक्ष द्वारा माननीय जज के सामने पेश किए गए साक्ष्यों और आरोपों पर आधारित है।
  2. चूंकि मामला अदालत में विचाराधीन (Sub-judice) है, इसलिए हमारा संस्थान आरोपों की सत्यता की आधिकारिक पुष्टि नहीं करता है। अदालत के अंतिम फैसले के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।

By jourpraveenkumar@gmail.com

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