चेयरमैन पति पर नियमविरुद्ध हस्तक्षेप और सरकारी धन के दुरुपयोग के गंभीर आरोप
19 जनवरी को विशाल धरना-प्रदर्शन की चेतावनी**
संवाददाता – रूपेश कुमार
दैनिक इंडिया टीवी न्यूज़, हस्तिनापुर
हस्तिनापुर।
नगर पंचायत हस्तिनापुर एक बार फिर गंभीर आरोपों और राजनीतिक घमासान के केंद्र में आ गई है। नगर पंचायत के कई सभासदों ने चेयरमैन पति पर प्रशासनिक कार्यों में अवैध हस्तक्षेप, विकास कार्यों में अनियमितता, सरकारी धन के दुरुपयोग और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों को लेकर सभासदों में गहरा रोष है और इसी के चलते उन्होंने धरना-प्रदर्शन का रास्ता अख्तियार करने की घोषणा कर दी है।
सभासदों का कहना है कि नगर पंचायत में लोकतांत्रिक व्यवस्था पूरी तरह से कमजोर कर दी गई है और निर्वाचित प्रतिनिधियों की आवाज को लगातार दबाया जा रहा है। आरोप है कि चेयरमैन पति स्वयं को नगर पंचायत का सर्वेसर्वा समझते हुए सभी निर्णय अपने स्तर पर ले रहे हैं, जबकि नियमानुसार ऐसा करना पूरी तरह गैरकानूनी है।
नगर पंचायत में बोर्ड गठन के बाद भी नहीं हो सकी नियमित बैठकें
सभासदों द्वारा दिए गए लिखित शिकायती पत्र में बताया गया है कि नगर पंचायत का बोर्ड गठन हुए काफी समय बीत चुका है, लेकिन आज तक नियमित रूप से बोर्ड बैठकों का आयोजन नहीं किया गया।
नगर पंचायत अधिनियम के अनुसार प्रत्येक माह बोर्ड बैठक अनिवार्य है, जिसमें विकास योजनाओं, बजट, निर्माण कार्यों और जनसमस्याओं पर चर्चा की जाती है, लेकिन हस्तिनापुर में इस प्रक्रिया को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया।
सभासदों का आरोप है कि जानबूझकर बोर्ड बैठकों को टाला जा रहा है ताकि विकास कार्यों और खर्चों पर कोई सवाल न उठा सके। इससे नगर पंचायत की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।
42 लाख रुपये की लागत से हुआ निर्माण कार्य बना विवाद का केंद्र
शिकायत पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि नगर पंचायत द्वारा लगभग 42 लाख रुपये की लागत से कुछ निर्माण कार्य कराए गए, लेकिन इन कार्यों की गुणवत्ता बेहद खराब है।
सभासदों का कहना है कि इन निर्माण कार्यों में मानकों की अनदेखी की गई, न तो कार्य प्रारंभ से पहले कोई प्रस्ताव पारित कराया गया और न ही गुणवत्ता की जांच कराई गई।
आरोप है कि इन कार्यों का भुगतान जल्दबाजी में कर दिया गया, जबकि निर्माण कार्य अभी भी अधूरा है। इससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका और भी गहरा जाती है।

सभासदों को अंधेरे में रखकर लिए जा रहे निर्णय
नगर पंचायत के निर्वाचित सभासदों का कहना है कि उन्हें किसी भी विकास योजना या वित्तीय निर्णय की जानकारी नहीं दी जाती।
नगर पंचायत में जो भी कार्य हो रहे हैं, उनकी न तो कोई सूचना दी जाती है और न ही किसी प्रकार की सहमति ली जाती है।
सभासदों ने आरोप लगाया कि चेयरमैन पति अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए अधिकारियों पर दबाव बनाते हैं और अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने का काम कर रहे हैं।
चेयरमैन पति पर प्रशासनिक हस्तक्षेप का आरोप
सबसे गंभीर आरोप यह है कि चेयरमैन पति स्वयं नगर पंचायत कार्यालय में बैठकर अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश देते हैं, जबकि वे किसी भी रूप में निर्वाचित या अधिकृत पद पर नहीं हैं।
सभासदों का कहना है कि यह न केवल प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भी सीधा हमला है।
अधिकारियों द्वारा भी कथित रूप से उनके निर्देशों का पालन किया जा रहा है, जिससे संदेह और गहराता जा रहा है शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि चेयरमैन पति पूर्व में भी विद्युत विभाग में जेई के पद पर रहते है ।
विकास कार्यों में भारी अनियमितता का दावा
सभासदों के अनुसार, नगर पंचायत में जो भी विकास कार्य दिखाए जा रहे हैं, वे या तो कागजों में हैं या फिर बेहद घटिया स्तर के हैं।
नालियों, सड़कों और अन्य बुनियादी सुविधाओं के निर्माण में मानकों की अनदेखी की गई है।
आरोप है कि कुछ कार्यों के लिए टेंडर प्रक्रिया का भी पालन नहीं किया गया और अपने चहेते ठेकेदारों को सीधे काम दे दिया गया।
जनता में बढ़ता आक्रोश
नगर पंचायत के हालात को लेकर आम जनता में भी नाराजगी बढ़ती जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास कार्यों के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है, जबकि जमीनी स्तर पर कोई सुधार नहीं दिख रहा।
नालियां जाम हैं, सड़कों की हालत खराब है और साफ-सफाई की व्यवस्था भी चरमराई हुई है।
19 जनवरी को विशाल धरना-प्रदर्शन की घोषणा
सभासदों ने ऐलान किया है कि यदि उनकी शिकायतों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो 19 जनवरी 2026 को सुबह 9:05 बजे नगर पंचायत कार्यालय के सामने विशाल धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
इस धरना-प्रदर्शन में सभी सभासद, स्थानीय नागरिक और सामाजिक संगठन शामिल होंगे।
सभासदों का कहना है कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती।
प्रशासन से उच्च स्तरीय जांच की मांग
सभासदों ने जिलाधिकारी और शासन से मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
साथ ही नगर पंचायत में हुए सभी विकास कार्यों और खर्चों का ऑडिट कराया जाए।
उन्होंने यह भी मांग की है कि जांच पूरी होने तक चेयरमैन पति को नगर पंचायत के कार्यों से पूरी तरह दूर रखा जाए।
राजनीतिक हलकों में भी मचा हड़कंप
इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
भाजपा से जुड़े सभासदों द्वारा जारी प्रेस-विज्ञप्ति के बाद विपक्षी दलों ने भी सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
स्थानीय राजनीति में यह मुद्दा आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक रूप ले सकता है।
क्या कहता है प्रशासन?
फिलहाल इस पूरे मामले में नगर पंचायत प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
हालांकि सूत्रों का कहना है कि शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है और उच्च अधिकारियों को इसकी जानकारी दे दी गई है।

हस्तिनापुर नगर पंचायत में उठे भ्रष्टाचार के आरोप न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यशैली पर सवाल खड़े करते हैं।
यदि समय रहते निष्पक्ष जांच और ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो यह मामला और भी तूल पकड़ सकता है।
अब सभी की निगाहें प्रशासन और शासन के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह जनता और जनप्रतिनिधियों के विश्वास को बहाल करने के लिए क्या कदम उठाता है।
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