हस्तिनापुर | संवाद सूत्र संपदीकीय | दैनिक इंडिया टीवी न्यूज़
नगर पंचायत हस्तिनापुर में इन दिनों हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। कार्यालय के भीतर ही जनप्रतिनिधियों द्वारा कर्मचारियों के साथ कथित तौर पर गाली-गलौज, अभद्र व्यवहार और मारपीट की धमकी दिए जाने का मामला सामने आने के बाद नगर पंचायत के समस्त कर्मचारी आंदोलित हो उठे हैं। मामला इतना तूल पकड़ चुका है कि अब नगर पंचायत कार्यालय का कामकाज प्रभावित होने लगा है और सफाई कर्मियों ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा।
कार्यालय में कार्यरत कर्मचारी के साथ अभद्रता का आरोप
दिनांक 17 जनवरी 2026 को दोपहर लगभग 02:45 बजे नगर पंचायत हस्तिनापुर के कार्यालय में महादेव मंडल ठेका प्रदाता का एक कर्मचारी अपने नियमित कार्य में संलग्न था। इसी दौरान नगर पंचायत के वार्ड संख्या-01 के सभासद प्रदीप नागर, वार्ड संख्या-08 के सभासद रोहित भूहियार , वार्ड संख्या-09 के अभिषेक, तथा वार्ड संख्या-14 के सभासद दिवाकर दत्ता अचानक कार्यालय में पहुंचे।
आरोप है कि इन सभी जनप्रतिनिधियों ने कार्यालय में पहुंचते ही महादेव मंडल ठेका प्रदाता के कर्मचारी के साथ गाली-गलौज शुरू कर दी और बात यहीं नहीं रुकी, बल्कि कर्मचारी को धमकाते हुए कार्यालय से बाहर बुलाया गया। प्रेस विज्ञप्ति में साफ तौर पर उल्लेख है कि कर्मचारी को मारने-पीटने की धमकी दी गई, जिससे कार्यालय में मौजूद अन्य कर्मचारियों में भय का माहौल बन गया।

जनप्रतिनिधियों के रवैये से कर्मचारियों में रोष
इस घटना के बाद नगर पंचायत के कर्मचारियों में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया। कर्मचारियों का कहना है कि यदि नगर पंचायत कार्यालय के भीतर ही कर्मचारी सुरक्षित नहीं हैं, तो वे किस भरोसे से अपना कार्य करें। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि यह पहली बार नहीं है जब सभासदों द्वारा कर्मचारियों के साथ इस तरह का व्यवहार किया गया हो, बल्कि पूर्व में भी इस प्रकार की घटनाएं सामने आती रही हैं, जिन्हें नजरअंदाज किया जाता रहा।
18 जनवरी को सांकेतिक धरना, कार्यालय का कामकाज प्रभावित
घटना के विरोध में दिनांक 18 जनवरी 2026 को प्रातः 08:00 बजे से नगर पंचायत हसतिनापुर के समस्त कर्मचारियों द्वारा एक दिवसीय सांकेतिक धरना दिया गया। धरने के चलते नगर पंचायत कार्यालय में रोजमर्रा का कार्य प्रभावित रहा और आम जनता को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
धरने के दौरान कर्मचारियों ने एकजुट होकर इस पूरे घटनाक्रम की कड़ी निंदा की और इसे कर्मचारियों के सम्मान और सुरक्षा पर सीधा हमला बताया।
मांगें उच्च अधिकारियों के समक्ष रखी गईं
सांकेतिक धरने के दौरान कर्मचारियों ने अपनी तीन प्रमुख मांगें उच्च अधिकारियों के समक्ष रखीं, जिनमें स्पष्ट रूप से कहा गया कि यदि इन मांगों को शीघ्र पूरा नहीं किया गया, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
- वार्ड संख्या 01, 08, 09 एवं 14 के संबंधित सभासदों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
- भविष्य में नगर पंचायत के किसी भी कर्मचारी के साथ सभासदों द्वारा कोई अभद्र व्यवहार न किया जाए।
- नगर पंचायत में कार्यरत सभी कर्मचारियों का सभासदों द्वारा मान-सम्मान सुनिश्चित किया जाए।
कर्मचारियों का कहना है कि वे विकास कार्यों में पूरा सहयोग करते हैं, लेकिन उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार भी जरूरी है।
अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी
यदि कर्मचारियों की मांगों को पूर्ण रूप से स्वीकार नहीं किया गया, तो दिनांक 19 जनवरी 2026 से अखिल भारतीय सफाई मजदूर कांग्रेस शाखा हस्तिनापुर के बैनर तले अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।
कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि इस स्थिति में नगर पंचायत का संपूर्ण कार्य ठप हो सकता है, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित जनप्रतिनिधियों की होगी।
कर्मचारियों ने जताई एकजुटता
धरना प्रदर्शन में नगर पंचायत के बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने भाग लिया। प्रेस विज्ञप्ति पर कई कर्मचारियों के हस्ताक्षर दर्ज हैं, जो यह दर्शाते हैं कि पूरा कर्मचारी वर्ग इस मुद्दे पर एकजुट है। कर्मचारियों का कहना है कि यह लड़ाई किसी एक कर्मचारी की नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम में सम्मान और सुरक्षा की है।
प्रशासन पर बढ़ा दबाव
इस पूरे घटनाक्रम के बाद नगर पंचायत प्रशासन पर दबाव बढ़ता जा रहा है। यदि जल्द ही कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। नगर क्षेत्र की जनता भी चाहती है कि यह मामला शांतिपूर्ण तरीके से सुलझे, ताकि विकास कार्य प्रभावित न हों।

राजनीतिक गलियारों में हलचल
सभासदों पर लगे आरोपों के बाद स्थानीय राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। विपक्षी खेमे इस मुद्दे को लेकर हमलावर हो सकते हैं, वहीं सत्तापक्ष के लिए यह मामला असहज स्थिति पैदा कर सकता है।
कर्मचारियों की सुरक्षा पर सवाल
यह घटना नगर पंचायतों में कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा करती है। यदि जनप्रतिनिधि ही कर्मचारियों के साथ इस तरह का व्यवहार करेंगे, तो शासन-प्रशासन की छवि भी धूमिल होगी।
अब सबकी नजर प्रशासन के फैसले पर
फिलहाल सबकी नजर उच्च अधिकारियों के फैसले पर टिकी हुई है। क्या कर्मचारियों की मांगों को माना जाएगा या आंदोलन और तेज होगा, यह आने वाले दिनों में साफ हो जाएगा।
