
हस्तिनापुर।
हस्तिनापुर नगर पंचायत में बीते कई दिनों से सुलग रही सियासी आग अब खुलकर भड़क उठी है। सभासदों और चेयरमैन पति के बीच चल रही राजनीतिक जंग ने ऐसा रूप ले लिया है कि अब मामला पंचायत की चारदीवारी से निकलकर सीधे थाने की दहलीज तक पहुंच गया है। ठेका प्रथा पर कार्यरत कर्मचारी के साथ हुई बदसलूकी की घटना ने नगर की राजनीति में भूचाल ला दिया है।
जानकारी के मुताबिक नगर पंचायत में कार्यरत कर्मचारी महादेव के साथ सभासद रोहित भूहियार द्वारा बदसलूकी की गई। घटना के बाद नगर पंचायत परिसर में जमकर गहमागहमी हुई। हालात बिगड़ते देख नगर पंचायत के कुछ जिम्मेदार लोगों ने बीच-बचाव कर आपसी फैसला भी करवा दिया, जिससे लगा कि मामला यहीं थम जाएगा। लेकिन राजनीति में अक्सर सन्नाटा तूफान से पहले का संकेत होता है।
कुछ ही समय बाद अचानक कर्मचारी महादेव ने हस्तिनापुर थाने पहुंचकर सभासद रोहित भूहियार के खिलाफ लिखित तहरीर दे दी। तहरीर दिए जाने की खबर फैलते ही नगर पंचायत में हड़कंप मच गया। इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं—क्या मामला दबाया जा रहा था? या फिर किसी बड़े सियासी खेल की पटकथा पहले से लिखी जा चुकी थी?
मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब सभासद रोहित भूहियार ने भी पलटवार करते हुए हस्तिनापुर थाने में जवाबी तहरीर दाखिल कर दी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरा घटनाक्रम जानबूझकर नगर पंचायत का माहौल खराब करने और 19 तारीख को प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन को विफल करने की साजिश का हिस्सा है। उनका कहना है कि उन्हें राजनीतिक तौर पर फंसाने की कोशिश की जा रही है।
नगर पंचायत के अन्य सभासदों का आरोप है कि चेयरमैन पति के इशारे पर पूरा खेल खेला जा रहा है, ताकि भ्रष्टाचार, बोर्ड बैठक न होने और विकास कार्यों में अनियमितताओं जैसे गंभीर मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाया जा सके। सभासदों का साफ कहना है कि यह सिर्फ बदसलूकी का मामला नहीं, बल्कि सत्ता बचाने की लड़ाई है।
इधर नगर में चर्चा है कि नगर पंचायत अब विकास के बजाय विवादों का अखाड़ा बनती जा रही है। आम लोग पूछ रहे हैं कि जब जनप्रतिनिधि ही एक-दूसरे पर आरोप लगाने में व्यस्त रहेंगे, तो जनता की समस्याओं का समाधान कौन करेगा?
फिलहाल दोनों पक्षों की तहरीरों के बाद पुलिस जांच में जुट गई है। लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह साफ कहा जा रहा है कि यह मामला अभी शांत नहीं होगा। 19 तारीख को प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन से पहले यह विवाद और उग्र रूप ले सकता है।
हस्तिनापुर की राजनीति में यह साफ हो गया है कि यह सिर्फ एक बदसलूकी की घटना नहीं, बल्कि सत्ता, दबाव और सियासी वर्चस्व की जंग है—जिसका फैसला अब सड़क से लेकर थाना और शायद आगे प्रशासनिक गलियारों तक होता नजर आएगा।

इस पूरे प्रकरण को लेकर नगर पंचायत के अन्य सभासदों ने भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पहले आपसी सहमति से मामला निपटा दिया गया था, लेकिन इसके बाद अचानक थाने में तहरीर दिया जाना कई संदेहों को जन्म देता है। सभासदों का आरोप है कि यह सब कुछ नगर पंचायत में चल रहे बड़े राजनीतिक टकराव से जुड़ा हुआ है, जिसमें चेयरमैन पति की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं हो रही हैं।
नगर पंचायत में इस समय हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। आरोप-प्रत्यारोप के इस दौर में विकास कार्य और प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि नेताओं और जनप्रतिनिधियों की आपसी लड़ाई का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है।
फिलहाल दोनों पक्षों की ओर से तहरीर दिए जाने के बाद मामला पुलिस जांच के दायरे में आ गया है। हस्तिनापुर थाना पुलिस द्वारा दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर जांच की जा रही है। अब देखना होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।
नगर की सियासत पर नजर रखने वालों का मानना है कि 19 तारीख को प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन से पहले यह मामला और तूल पकड़ सकता है। ऐसे में प्रशासन और पुलिस की भूमिका भी अहम मानी जा रही है।
