संवादसूत्र दैनिक इंडिया टीवी न्यूज
हस्तिनापुर/मेरठ
ऐतिहासिक और पौराणिक नगरी हस्तिनापुर के पावन रामलीला मैदान में इन दिनों रामलीला महोत्सव की धूम मची हुई है। इस भव्य आयोजन का दूसरा दिन दर्शकों के लिए पूरी तरह से भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक प्रेरणा से भरपूर रहा। मंच पर कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किए गए एक के बाद एक सजीव दृश्यों ने पूरे वातावरण को राममय बना दिया।
1. तीनों भाइयों (रावण, कुंभकर्ण और विभीषण) के जन्म और तपस्या का रोमांचक मंचन

कार्यक्रम की शुरुआत रावण, कुंभकर्ण और विभीषण के जन्म तथा उनके अनोखे स्वभावों की कथा से की गई:
- रावण का पराक्रम: कलाकारों ने रावण की असाधारण शक्ति, उसकी असीम महत्वाकांक्षा और युद्ध कौशल को बेहद प्रभावशाली ढंग से दर्शाया।
- कुंभकर्ण का बल: कुंभकर्ण की विशालकाय शारीरिक संरचना और उसके अपार बल के प्रसंग को भी बखूबी मंचित किया गया।
- विभीषण की धर्मपरायणता: दूसरी ओर, विभीषण को धर्म, नीति और सदाचार के प्रतीक के रूप में पेश किया गया।
- कठोर तपस्या: इसके बाद तीनों भाइयों द्वारा ब्रह्मजी को प्रसन्न करने के लिए की गई कठिन तपस्या और उनसे विभिन्न वरदान प्राप्त करने के दृश्यों ने दर्शकों का मन मोह लिया। इन प्रसंगों के माध्यम से यह एक बहुत बड़ा संदेश भी मिला कि ताकत और सामर्थ्य का असली अर्थ तभी सार्थक होता है, जब उसका उपयोग सिर्फ धर्म और लोककल्याण के लिए किया जाए।
2. धरती की व्यथा और भगवान विष्णु के अवतार की पावन पृष्ठभूमि
मंचन का अगला और सबसे भावुक कर देने वाला हिस्सा पृथ्वी की पुकार से जुड़ा था:
- अधर्म का प्रकोप: पृथ्वी पर लगातार बढ़ रहे अत्याचारों और अधर्म के भार से त्रस्त होकर धरती माता ने देवताओं के सामने अपनी पीड़ा और करुण पुकार रखी।
- देवताओं की प्रार्थना: समस्त देवताओं ने मिलकर भगवान विष्णु से यह प्रार्थना की कि वे इस पृथ्वी से अधर्म का नाश करें और पुनः धर्म की स्थापना करें।
- श्रीराम का अवतरण: इसी मार्मिक प्रसंग के जरिए उस दिव्य पृष्ठभूमि को दर्शाया गया, जिसके फलस्वरूप भगवान विष्णु ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के रूप में पृथ्वी पर अवतार लेने का निर्णय लिया।
3. अयोध्या में खुशियों की लहर: राजा दशरथ के यहाँ चार राजकुमारों का जन्म

रामलीला के दूसरे दिन का अंतिम और सबसे ज्यादा आनंददायक प्रसंग भगवान श्रीराम और उनके भाइयों के जन्मोत्सव का रहा:
- संतान सुख की प्राप्ति: अयोध्या के प्रतापी राजा दशरथ लंबे समय तक संतान न होने के कारण अत्यंत चिंतित रहते थे।
- पुत्रेष्टि यज्ञ: राजा दशरथ द्वारा संतान प्राप्ति के लिए विशेष रूप से पुत्रेष्टि यज्ञ कराया गया।
- राजकुमारों का आगमन: इस यज्ञ के पुण्य प्रभाव से राजा दशरथ के यहाँ चारों राजकुमारों का भव्य जन्म हुआ। माता कौशल्या की गोद में भगवान श्रीराम, माता कैकेयी के यहाँ भरत और माता सुमित्रा के यहाँ लक्ष्मण व शत्रुघ्न के जन्म के दृश्यों ने पंडाल में बैठे हर दर्शक को भावविभोर कर दिया।
- उत्सव का माहौल: इन पवित्र प्रसंगों के मंचन के साथ ही पूरी अयोध्या नगरी और रामलीला परिसर में खुशियों की किलकारियाँ गूँज उठीं और दर्शकों ने पूरे उत्साह व श्रद्धा के साथ इस उत्सव का भरपूर आनंद लिया।
