स्थान: हस्तिनापुर (मेरठ) | विशेष कवरेज: श्री रामलीला महोत्सव
दैनिक इंडिया टीवी न्यूज़ ब्यूरो, हस्तिनापुर:
ऐतिहासिक एवं पौराणिक तीर्थ नगरी हस्तिनापुर में चल रहे भव्य श्री रामलीला महोत्सव के अंतर्गत आज का मंचन इतना भीषण, खौफनाक और दिल दहला देने वाला रहा, जिसे देखकर दर्शकों की साँसें थम गईं। मंच पर आज एक तरफ जहाँ विभीषण के निष्कासन और रामेश्वरम की स्थापना के पवित्र प्रसंग आए, वहीं दूसरी तरफ अंगद-रावण का अहंकार तोड़ने वाला संवाद तथा लक्ष्मण जी को शक्ति लगने और उनकी मूर्छा के वीभत्स व दर्दनाक दृश्य ने पूरे पंडाल में कोहराम मचा दिया। इस रोंगटे खड़े कर देने वाले महा-मंचन को देख उपस्थित जनसमूह भीतर तक कांप उठा।
1. विभीषण शरणागति: रावण द्वारा लंका से निष्कासन और धर्म का मार्ग
- रावण का अहंकार और देश निकाला: आज के मंचन की शुरुआत एक बेहद नाटकीय और तनावपूर्ण प्रसंग से हुई, जहाँ सत्य का साथ देने पर अहंकारी रावण ने अपने ही भाई विभीषण को लात मारकर और अपमानित कर लंका से बाहर निकाल दिया।
- शरण और अभयदान: लंका से निकाले जाने के बाद विभीषण सीधे प्रभु श्रीराम की शरण में पहुँचते हैं, जहाँ भगवान राम उन्हें गले लगाकर अपनी शरण में लेते हैं और अभयदान देते हैं। इस दृश्य ने दर्शकों के दिलों को छू लिया।
2. रामेश्वरम की स्थापना: समुद्र तट पर भगवान श्री राम का महा-पूजन
- समुद्र पार करने का संकल्प: युद्ध से पूर्व भगवान श्री राम द्वारा समुद्र तट पर भगवान शिव के शिवलिंग की स्थापना यानी ‘रामेश्वरम स्थापना’ के अलौकिक और भव्य प्रसंग का मंचन किया गया।
- भक्ति और शक्ति का संगम: इस पावन दृश्य ने संपूर्ण रामलीला मैदान को पूरी तरह से आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति रस से सराबोर कर दिया, जिसे देख हर श्रद्धालु नतमस्तक हो गया।
3. अंगद-रावण संवाद: भरी सभा में रावण के छक्के छुड़ाने वाला खौफनाक संवाद
- संदेश लेकर पहुँचे अंगद: लंका की सभा में दूत बनकर गए बाली पुत्र अंगद और रावण के बीच हुआ आमना-सामना आज के मंचन का सबसे रोमांचक केंद्र रहा।
- अहंकार पर प्रहार: अंगद ने भरी सभा में अपना पैर जमाकर रावण के अहंकार को चुनौती दी और उसे हिला कर रख दिया। दोनों के बीच हुए तीखे और खौफनाक संवाद ने दर्शकों में भारी जोश भर दिया, जिसे देख सब दंग रह गए।
4. लक्ष्मण-मेघनाथ युद्ध और लक्ष्मण मूर्छा: कलेजा चीर देने वाला सबसे दर्दनाक और खौफनाक प्रसंग
- भीषण महासंग्राम: कथा इसके बाद अपने सबसे खतरनाक और वीभत्स मोड़ पर पहुँची, जब रणभूमि में मेघनाथ और लक्ष्मण जी के बीच अत्यंत भयंकर और खूनी युद्ध छिड़ गया।
- शक्ति का प्रहार और मूर्छा: मेघनाथ की शक्ति के प्रहार से जब लक्ष्मण जी मूर्छित होकर धरती पर गिरे, तो उस दृश्य को देखकर पंडाल में कोहराम मच गया। प्रभु श्रीराम का विलाप और चारों तरफ छाए मौत जैसे सन्नाटे ने दर्शकों के कलेजे को चीरकर रख दिया। इस मर्मस्पर्शी और दर्दनाक मंज़र को देखकर हर दर्शक की आँखें फटी रह गईं और सिसकियाँ गूँज उठीं।
उमड़ा महा-जनसैलाब
विभीषण शरणागति, रामेश्वरम स्थापना, अंगद-रावण संवाद और लक्ष्मण मूर्छा जैसे चार सबसे बड़े, संवेदनशील और दिल दहला देने वाले प्रसंगों के गवाह बनने के लिए हस्तिनापुर क्षेत्र एवं दूर-दराज के इलाकों से हज़ारों की संख्या में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। पूरा हस्तिनापुर क्षेत्र ‘जय श्रीराम’ और ‘जय बजरंगबली’ के गगनभेदी जयकारों से गूँज उठा।




