संवाददाता रूपेश चौहानहस्तिनापुर क्षेत्र में उस समय माहौल गरमा गया जब खेड़ी कलां गांव की कृषि भूमि को विभागीय जमीन बताकर वन विभाग द्वारा की जा रही कार्रवाई के विरोध में भारतीय किसान यूनियन धन सिंह कोतवाल के राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन गुर्जर के नेतृत्व में सैकड़ों किसान, पदाधिकारी और ग्रामीण हस्तिनापुर वन क्षेत्राधिकारी कार्यालय पहुंच गए। किसानों ने वन विभाग कार्यालय का घेराव कर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।धरने में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुनील धामा, धन सिंह कोतवाल, संगठन के कई वरिष्ठ पदाधिकारी तथा खेड़ी कलां गांव के बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि वन विभाग किसानों की पीढ़ियों पुरानी खेती योग्य भूमि को अपनी जमीन बताकर जबरन कब्जे की कार्रवाई कर रहा है। साथ ही किसानों की खड़ी फसलों को नष्ट करने और खेतों में डोलबंदी व वृक्षारोपण कराने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे किसानों में भारी रोष है।किसान नेताओं ने कहा कि खेड़ी कलां गांव गंगा किनारे बसा हुआ है, जहां वर्षों से किसान खेती कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते आ रहे हैं। हर वर्ष गंगा की बाढ़ और कटान से किसानों की काफी जमीन बह चुकी है, बावजूद इसके बची हुई उपजाऊ भूमि पर भी वन विभाग दावा कर रहा है, जो किसानों के साथ सीधा अन्याय है।राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन गुर्जर और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुनील धामा ने कहा कि जब गांव की भूमि चकबंदी में नहीं है, तो वन विभाग किस आधार पर जमीन को अपनी बता रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसानों का उत्पीड़न बंद नहीं हुआ तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा और जिले से लेकर शासन स्तर तक संघर्ष छेड़ा जाएगा।किसानों ने मांग रखी कि एक सप्ताह तक किसी भी प्रकार की कार्रवाई रोकी जाए तथा राजस्व विभाग से जमीन की पैमाइश कराई जाए। इसके बाद ही कोई निर्णय लिया जाए। मौके पर किसानों और वन क्षेत्राधिकारी खुशबू उपाध्याय के बीच वार्ता हुई, जिसमें रेंजर ने राजस्व विभाग की जांच पूरी होने तक कार्रवाई न करने का आश्वासन दिया। इसके बाद किसानों ने धरना समाप्त किया।धरने के दौरान वन विभाग कार्यालय पर भारी भीड़ उमड़ी रही और पूरे दिन माहौल तनावपूर्ण बना रहा। किसानों ने साफ कहा कि यदि आश्वासन पर अमल नहीं हुआ तो हस्तिनापुर में बड़ा किसान आंदोलन होगा।
