हस्तिनापुर (मेरठ), 04 जून 2026। ऐतिहासिक नगरी हस्तिनापुर के एक वार्ड में इस समय नगर पंचायत निधि से हो रहा नाला और पुलिया निर्माण चर्चा और विवादों के केंद्र में आ गया है。 निर्माण कार्य में अपनाई जा रही ‘एक्सप्रेस स्पीड’ और तकनीकी खामियों ने निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं, जब इस संबंध में स्थानीय सजग नागरिकों और मीडिया कर्मियों ने मौके पर जाकर जमीनी हकीकत देखनी चाहनी, तो जनप्रतिनिधि (सभासद) अपनी जिम्मेदारी निभाने और जवाब देने के बजाय उलटा गुस्सा करने और चिल्लाने लगे।
📸 तस्वीर खोल रही है दावों की पोल

वायरल हो रही और मौके से मिली एक्सक्लूसिव तस्वीर को अगर ध्यान से देखा जाए, तो सिविल इंजीनियरिंग के बुनियादी नियमों को पूरी तरह दरकिनार किया गया है। तस्वीर में साफ दिख रहा है कि नाले का निचला हिस्सा (DPC/बेस) अभी पूरी तरह गीला और कच्चा है। तकनीकी नियमों के मुताबिक, कंक्रीट के किसी भी बेस को ढालने के बाद उसे सेट होने के लिए कम से कम 24 से 48 घंटे का समय और उसके बाद निरंतर तराई (Curing) की आवश्यकता होती है। लेकिन यहाँ हैरानी की बात यह है कि बिना तराई किए, अगले ही दिन कच्चे बेस के ऊपर भारी-भरकम साइड की कंक्रीट की दीवारें ढालने का काम शुरू कर दिया गया।
इतना ही नहीं, जागरूक नागरिकों का आरोप है कि निचले हिस्से में डाली गई कंक्रीट में सीमेंट की मात्रा मानक से काफी कम और सूखी रोड़ी ज्यादा दिखाई दे रही है, जिसे तकनीकी भाषा में ‘हनीकॉम्बिंग’ कहा जाता है। इस तरह का खोखला निर्माण पानी के लगातार बहाव और पुलिया पर आने वाले भारी वाहनों का दबाव झेलने में पूरी तरह अक्षम साबित होता है।
🗣️ पहले कहा “निजी खर्चा”, ऑन-कैमरा माना “सरकारी निधि”
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब निर्माण स्थल पर मौजूद सभासद से इस जल्दबाजी और तकनीकी लापरवाही पर सवाल पूछा गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शुरुआत में जनता और मीडिया को गुमराह करने के उद्देश्य से यह दावा किया गया कि यह काम “खुद के निजी खर्चे” से कराया जा रहा है।
लेकिन जब मीडिया ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए इस पर और तकनीकी सवाल किए, तो माननीय अपना आपा खो बैठे। उन्होंने न सिर्फ तीखे तेवर दिखाए और चिल्लाकर बात की, बल्कि ऑन-रिकॉर्ड कैमरे पर यह स्वीकार भी किया कि यह निर्माण “नगर पंचायत निधि” से ही कराया जा रहा है। जब उनसे बिना तराई किए कच्चे बेस पर दीवार उठाने का वैज्ञानिक कारण पूछा गया, तो उनका अजीबोगरीब तर्क था कि “जब स्लैब डबल करके बन जाएगा तो यह अपने आप सूख जाएगा।”
🔬 वैज्ञानिक नियमों के खिलाफ तर्क
सारे सिविल इंजीनियर्स और विशेषज्ञ इस बात को भली-भांति जानते हैं कि कंक्रीट को मजबूती ‘सूखने’ से नहीं, बल्कि पानी के साथ होने वाली रासायनिक प्रक्रिया (Hydration) से मिलती है। अगर नींव की कंक्रीट में सीमेंट कम है और वह बिना पके ही ऊपर की दीवारों का वजन ढोएगी, तो उसमें अंदरूनी दरारें आना तय है। आने वाले समय में पहली ही बरसात या पानी के तेज बहाव में यह नाला नीचे से धंस सकता है, जिससे जनता के टैक्स के लाखों रुपये सीधे पानी में बह जाएंगे।
📞 अधिकारियों का क्या है कहना?
इस पूरे मामले और घटिया निर्माण की शिकायतों के संबंध में जब दैनिक इंडिया टीवी न्यूज की टीम ने नगर पंचायत हस्तिनापुर के अधिशासी अधिकारी (EO) से उनके आधिकारिक मोबाइल नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया, तो उनकी तरफ से फोन नहीं उठाया गया。 अधिकारियों का पक्ष आते ही उसे प्रमुखता से समाचार में शामिल किया जाएगा。
क्षेत्र के जागरूक नागरिकों ने अब इस मामले की लिखित शिकायत और मौके के वीडियो साक्ष्य जिला प्रशासन और मुख्यमंत्री पोर्टल (IGRS) पर भेजने का मन बना लिया है, ताकि मौके पर तकनीकी टीम भेजकर इस कंक्रीट की जांच कराई जा सके और सरकारी धन का बंदरबांट होने से रोका जा सके।
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