दैनिक इंडिया टीवी न्यूज़
स्थान: हस्तिनापुर (मेरठ) | विशेष कवरेज: श्री रामलीला महोत्सव
दैनिक इंडिया टीवी न्यूज़ ब्यूरो, हस्तिनापुर:
ऐतिहासिक एवं पौराणिक तीर्थ नगरी हस्तिनापुर में चल रहे भव्य श्री रामलीला महोत्सव के अंतर्गत आज का मंचन ऐसा वज्रपात और भक्ति का ऐसा महासागर साबित हुआ, जिसे देखकर और पढ़कर हर इंसान का दिल अंदर तक हिल जाएगा। मंच पर आज त्याग, वियोग, अनन्य प्रेम और ममता के वे पन्ने पलटे गए, जिनकी कसक ने हर एक दर्शक की आँखें नम कर दीं।
आइए डालते हैं आज के उन रोंगटे खड़े कर देने वाले प्रसंगों पर एक नजर:
1. राजा दशरथ का मरण: पुत्र वियोग में तड़पते प्राण और सिसकता राजमहल
- प्राण त्याग का हृदयविदारक दृश्य: वन गमन के पश्चात पुत्र श्रीराम के वियोग में तड़पते राजा दशरथ के प्राण त्यागने का दृश्य इतना मार्मिक था कि पूरा रामलीला मैदान सिसकियों से गूँज उठा।
- असहनीय पीड़ा: दशरथ का यह मरण केवल एक राजा की मृत्यु नहीं, बल्कि पिता के अटूट प्रेम और विरह की वह पराकाष्ठा थी, जिसे देख दर्शकों का कलेजा कांप उठा।
2. श्री राम-निषादराज संवाद और केवट का अनूठा प्रेम
- निषादराज संवाद: वन के विकट रास्तों पर पहुँचने पर श्री राम और निषादराज के बीच हुआ आत्मीय संवाद देखकर यह अहसास हुआ कि प्रेम जात-पात और राजपाट से परे होता है।
- केवट की जिद और प्रभु के चरण धोए: गंगा तट पर पहुँचने पर जब केवट ने प्रभु श्रीराम के चरण धोने के लिए हठ पकड़ा और कहा— “कौशल किशोर तुमराई कृपा, पावन पखालि चहूँ चरण तुम्हारा”—तो वह भक्ति देखकर दर्शक भक्ति सागर में डूब गए। केवट का वह भोला प्रेम और उलाहना देख हर कोई अवाक् रह गया।




3. अमर ‘भरत मिलाप’: भाइयों का वह मिलन जिसने पत्थर को भी पिघला दिया
- इतिहास का सबसे भावुक क्षण: आज की लीला का सबसे बड़ा और आत्मा को झकझोर देने वाला पल वह रहा जब अयोध्या का राजपाठ ठुकराकर बड़े भाई को मनाने पहुँचे भरत और श्रीराम का आमना-सामना हुआ।
- रोमांचक वियोग: भाई भरत का विलाप और श्रीराम द्वारा उन्हें गले लगाने के उस दृश्य ने पंडाल में बैठे हर पुरुष, महिला और बच्चे की रोंगटे खड़े कर दिए। ‘भरत मिलाप’ के इस पवित्र प्रसंग ने साबित कर दिया कि दुनिया में भाई के प्रेम से बढ़कर कोई ताकत नहीं है।
जनसैलाब और भक्तिमय गूँज
आज की इस अत्यंत भावुक, दहल देने वाली और ऐतिहासिक लीला को देखने के लिए हस्तिनापुर और आसपास के क्षेत्रों से हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। पूरा हस्तिनापुर ‘जय श्रीराम’ और ‘भरत-लक्ष्मण की जय’ के नारों से गूँज उठा।
