ब्यूरो रिपोर्ट दैनिक इंडिया टीवी न्यूज़
मवाना (मेरठ):नगर पालिका मवाना के उन दावों की हवा पहली ही बारिश में निकल गई, जिनमें शहर को ‘जलभराव मुक्त’ बनाने का वादा किया गया था। पिछले दिनों हिंदुस्तान समाचार पत्र में प्रकाशित पालिका के विज्ञापन और दावों के अनुसार, शहर के 17 नालों की तलीझाड़ सफाई का काम युद्ध स्तर पर पूरा कर लिया गया था। इस सफाई कार्य के लिए करीब 41 लाख रुपये का बजट खर्च करने की जानकारी दी गई थी।दावे बनाम वास्तविकतानगर पालिका ने दावा किया था कि नालों की सफाई के कारण इस बार बरसात का पानी सड़कों पर नहीं भरेगा। हालांकि, 2 जुलाई 2026 को हुई मॉनसून की पहली बारिश ने ही पालिका के इन प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी। शहर की मुख्य सड़कों और गलियों में जलभराव की स्थिति ने साबित कर दिया कि या तो सफाई कार्य कागजों तक ही सीमित रहा या फिर सफाई की तकनीक ही सवालों के घेरे में है।जनता पूछ रही सवाल41 लाख रुपये के बड़े बजट के खर्च होने के बावजूद सड़कों पर जमा पानी ने स्थानीय निवासियों को भारी परेशानी में डाल दिया है। लोगों का कहना है कि यदि नालों की सफाई अंतिम चरण में थी, तो आखिर पानी निकासी का रास्ता क्यों बंद है? क्या यह सफाई केवल खानापूर्ति थी या बजट का दुरुपयोग?नगर पालिका प्रशासन को अब जनता को यह स्पष्ट करना होगा कि आखिर लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी शहर की यह दुर्दशा क्यों है। क्या पहली बारिश ने विकास के उन तमाम दावों को धो दिया है जो नगर पालिका द्वारा किए गए थे?

