ब्यूरो रिपोर्ट: रूपेश चौहानहस्तिनापुर/मवाना:हस्तिनापुर वन क्षेत्र में वन्यजीवों के संरक्षण को लेकर वन विभाग ने एक बार फिर बड़ी और प्रभावी कार्रवाई करते हुए अवैध शिकार करने वाले तीन आरोपियों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में सक्रिय शिकारियों और वन्यजीव अपराधियों में हड़कंप मच गया है। वन विभाग ने आरोपियों से ₹6 लाख का प्रशमन शुल्क (जुर्माना) वसूल कर सरकारी कोष में जमा कराया है, जो वन्यजीव अपराधों के विरुद्ध विभाग की सख्त कार्यशैली का बड़ा संदेश माना जा रहा है।वन विभाग को 23 जुलाई 2026 को गुप्त सूचना मिली थी कि हस्तिनापुर क्षेत्र के एक निजी खेत एवं ट्यूबवेल पर जंगली सूअरों के अवैध शिकार की तैयारी की जा रही है। सूचना मिलते ही वन क्षेत्राधिकारी श्रीमती खुशबू उपाध्याय के नेतृत्व में गठित टीम ने तत्काल छापेमारी की। मौके पर तीन व्यक्तियों को वन्यजीव शिकार की गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने पर गिरफ्तार कर लिया गया।गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हरदेव उर्फ डिब्बू पुत्र जोगा सिंह, गुरबख्श पुत्र जोगा सिंह, निवासी खादर राठौड़ा खुर्द, थाना हस्तिनापुर तथा बलबीर पुत्र अर्जुन, निवासी रामराज, जनपद मेरठ के रूप में हुई है।शिकार की पूरी तैयारी के साथ पकड़े गए आरोपीछापेमारी के दौरान वन विभाग ने शिकार में प्रयुक्त छह जाल, करंट प्रवाहित करने वाले बिजली के तार, एक देशी कट्टा, एक धारदार छूरा, एक तंदूरी भट्टी तथा कच्ची शराब बरामद की। बरामद सामान से स्पष्ट है कि आरोपी सुनियोजित तरीके से वन्यजीवों का अवैध शिकार करने की तैयारी में थे। वन विभाग की त्वरित कार्रवाई से इनकी योजना विफल हो गई और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई।वन क्षेत्राधिकारी खुशबू उपाध्याय का सख्त संदेशवन क्षेत्राधिकारी श्रीमती खुशबू उपाध्याय ने कहा कि हस्तिनापुर वन क्षेत्र में वन्यजीवों के अवैध शिकार, तस्करी अथवा किसी भी प्रकार की क्षति पहुंचाने वालों के खिलाफ शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance) की नीति अपनाई जा रही है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जाल, करंट या अन्य अवैध साधनों से वन्यजीवों का शिकार करना गंभीर अपराध है और ऐसे मामलों में किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा। भविष्य में भी वन विभाग की लगातार निगरानी और सघन अभियान जारी रहेंगे।वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत हुई कार्रवाईसभी आरोपियों के विरुद्ध वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की सुसंगत धाराओं के अंतर्गत विधिक कार्रवाई की गई। साथ ही ₹6 लाख का जुर्माना वसूल कर सरकारी कोष में जमा कराया गया। विभाग का कहना है कि यह कार्रवाई वन्यजीव अपराधियों के लिए एक कड़ा संदेश है कि कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई तय है।इन अधिकारियों ने निभाई अहम भूमिकाइस सफल अभियान में वन क्षेत्राधिकारी श्रीमती खुशबू उपाध्याय के निर्देशन में वन दरोगा अंकित यादव, ऋषभ सिंह एवं गौरव गर्ग तथा वनरक्षक अतुल स्वामी, नितिन कुमार, नितिन त्यागी एवं राजेश्वर की महत्वपूर्ण भूमिका रही।आमजन से सहयोग की अपीलवन विभाग ने क्षेत्रवासियों से अपील की है कि यदि कहीं भी वन्यजीवों के अवैध शिकार, तस्करी या वन्यजीव अपराध की जानकारी मिले तो तत्काल विभाग को सूचित करें। नागरिकों के सहयोग से ही वन्यजीवों की सुरक्षा और जैव विविधता का संरक्षण प्रभावी ढंग से संभव है।वन विभाग का संदेश:”वन्यजीव हमारी राष्ट्रीय धरोहर हैं। उनके संरक्षण की जिम्मेदारी हम सभी की है। अवैध शिकार या तस्करी में शामिल किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हस्तिनापुर वन क्षेत्र में वन्यजीव अपराध किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे

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