हस्तिनापुर/मेरठ। भारत की संस्कृति और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए, देश के विभिन्न सामाजिक संगठनों और प्रबुद्ध नागरिकों ने केंद्र सरकार तथा सभी राज्य सरकारों से भारतीय देशी गौवंश को ‘राष्ट्रीय सम्मान’ प्रदान करने की पुरजोर मांग की है। संविधान के दायरे में रहकर और पूरी तरह से अहिंसक तरीके से इस अभियान के चार मुख्य उद्देश्यों को रेखांकित किया गया है।संस्था का मुख्य लक्ष्य भारतीय देशी गौवंश की रक्षा और उन्हें समाज में एक सम्मानित स्थान दिलाना है। इस अभियान के तहत निम्नलिखित प्रमुख मांगों को सरकार के समक्ष रखा गया है:अभियान के 4 मुख्य बिंदु:गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध: भारत में गौहत्या पर पूरी तरह से कानूनी रोक लगाई जाए ताकि देशी गौवंश पूरी तरह सुरक्षित हो सके।
गौमाता को ‘राष्ट्र माता’ का दर्जा: गौमाता को राष्ट्र माता, राष्ट्र देव, राष्ट्र आराध्या और राष्ट्र धरोहर के रूप में सम्मानित पद प्रदान किया जाए, जिससे देशी गौ नंदी को भी उचित सम्मान मिल सके।केंद्रीय गौ सेवा मंत्रालय का गठन: गौ सेवा के लिए विशेष रूप से एक केंद्रीय कानून लागू किया जाए और एक समर्पित ‘केंद्रीय गौ सेवा मंत्रालय’ बनाया जाए, ताकि पूरे भारतवर्ष में समान रूप से गौवंश की सेवा हो सके।गौ आधारित कृषि को बढ़ावा: गौचर बोर्ड का गठन हो और चारा सुरक्षा नीति तय की जाए। साथ ही, वेद लक्षणा गौवंश से प्राप्त पंचगव्य उत्पादों के निर्माण और विपणन (मार्केटिंग) को बढ़ावा दिया जाए ताकि कृषि को गौ आधारित बनाकर किसानों को समृद्ध किया जा सके।संस्कृति और संविधान का संगमइस मांग के पीछे का मुख्य उद्देश्य भारतीय संस्कृति के हितों की रक्षा करना है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि सरकार इन मांगों को स्वीकार करती है, तो इससे न केवल धार्मिक भावनाएं सुरक्षित होंगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और जैविक कृषि (Organic Farming) को भी एक नई दिशा मिलेगी।

